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आश्रमशाला से 16 वर्षीय आदिवासी छात्र लापता

– 45 विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी? प्रशासन पर उठे सवाल

नागपुर/देवलापार :- आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा पर शासन की ओर से करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। विद्यार्थियों के निवास, भोजन, शिक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी आश्रमशाला एवं छात्रावास प्रशासन की होती है। लेकिन देवलापार स्थित स्वामी विवेकानंद आदिवासी विद्यार्थी छात्रावास का 16 वर्षीय छात्र लापता होने की घटना सामने आने के बाद छात्रावासों में विद्यार्थियों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। छात्रावास में करीब 45 विद्यार्थी निवासरत हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है, यह सवाल उठने लगा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वामी विवेकानंद आदिवासी विद्यार्थी छात्रावास, देवलापार में तिरोडी ग्राम, मिरजापुर, तहसील पांढरवाड़ी, जिला बालाघाट (मध्य प्रदेश) निवासी संग्राम भीमप्रसाद पटले (16) रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहा था। शिकायत के अनुसार, 29 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 10 बजे संग्राम दसवीं की परीक्षा देने के लिए छात्रावास से स्वामी विवेकानंद विद्यालय गया था। दोपहर करीब 1 बजे परीक्षा समाप्त होने के बाद वह विद्यालय से बाहर निकला। इसके बाद स्कूल की पोशाक बदलकर देवलापार की दिशा में जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन देर रात तक वह छात्रावास वापस नहीं लौटा। उसके वापस नहीं आने पर छात्रावास प्रशासन, परिजनों, रिश्तेदारों और मित्रों ने उसकी तलाश की। आसपास के क्षेत्रों में खोजबीन के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। देवलापार पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। परीक्षा देने गया छात्र वापस लौटते समय आखिर कहां और किन परिस्थितियों में लापता हुआ, इसकी जांच पुलिस कर रही है।

विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय होगी क्या?

आदिवासी समाज के अनेक विद्यार्थी बेहतर शिक्षा की उम्मीद में अपने परिवार से दूर रहकर शासकीय छात्रावासों में रहते हैं। अभिभावक शासन की व्यवस्था पर भरोसा कर अपने बच्चों को छात्रावास में भेजते हैं। ऐसे में किसी विद्यार्थी का लापता होना केवल एक घटना नहीं, बल्कि छात्रावास की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

45 विद्यार्थियों के छात्रावास में प्रतिदिन विद्यार्थियों की उपस्थिति, विद्यालय आने-जाने का रिकॉर्ड, छात्रावास से बाहर जाने की अनुमति तथा वापस लौटने की पुष्टि के लिए आखिर कौन-सी व्यवस्था लागू है? संग्राम के लापता होने के बाद छात्रावास प्रशासन ने क्या कदम उठाए? उसकी अनुपस्थिति की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों और परिजनों को तत्काल दी गई थी या नहीं? इन सभी सवालों का जवाब मिलना जरूरी है।

इस पूरे मामले की आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से गहन जांच कर विद्यार्थियों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है। पुलिस जांच के साथ ही छात्रावास की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था की स्वतंत्र जांच किए जाने की आवश्यकता भी जताई जा रही है।

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