नागपुर :- महानगरपालिका की ओर से 31 अक्टूबर 2026 को सुबह 6 बजे कस्तूरचंद पार्क मैदान, वर्धमान नगर, नागपुर से ‘यूनिटी मैराथन’ का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए शहर में लगाए गए बैनरों पर जनप्रतिनिधियों की तस्वीरों को लेकर अब राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कथित तोर पर मनपा के सत्ता पक्ष के नेता के बैनर से, विशेषकर प्रभाग नं. 23 में लगे बैनरों से उपमहापौर, उपनेता और स्थायी समिति अध्यक्ष की तस्वीरें गायब थीं, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। साथ ही, बैनर में प्रोटोकॉल का भी पालन नहीं किया गया और प्रभाग नं. 23 के नगरसेवकों को भी वहां लगे बैनरों से नदारद रखा गया, जिसके कारण इस मामले की चर्चा पूरे महानगर में हो रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि क्या यह बैनर की जंग किसी बड़ी राजनीतिक हलचल का संकेत तो नहीं है? क्या यह सत्ता पक्ष के नेता और स्थायी समिति अध्यक्ष के बीच चल रही वर्चस्व की जंग की चर्चा को आम जनता के बीच उजागर कर रहा है?
नागपुर महानगरपालिका में सत्तापक्ष के भीतर वर्चस्व को लेकर खींचतान शुरू होने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ रही हैं। हाल ही में मनपा की ओर से आयोजित ‘यूनिटी मैराथन’ कार्यक्रम के बैनरों पर कुछ प्रमुख पदाधिकारियों की तस्वीरें नजर नहीं आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि सत्ता पक्ष के नेता और स्थायी समिति अध्यक्ष के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज हो रही है। क्या आने वाले दिनों में इसका असर पोस्टर और बैनर की राजनीति में भी दिखाई देगा?
मनपा का कार्यक्रम या सत्ता पक्ष के नेता का प्रचार? – इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि कार्यक्रम का आयोजन महानगरपालिका की ओर से किया गया था और आयोजन पर होने वाला खर्च भी मनपा द्वारा वहन किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद, कुछ बैनरों की बनावट और उन पर प्रमुखता से दिखाई गई तस्वीरों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जनता के बीच यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या कार्यक्रम का आयोजन मनपा ने किया था या सत्ता पक्ष के नेता नरेंद्र उर्फ बाल्या बोरकर ने? ऐसी बातें भी महानगर में चल रही हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कार्यक्रम के प्रचार में सत्ता पक्ष के नेता बंटी उर्फ बाल्या बोरकर की प्रमुखता दिखाई दी, जबकि अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारियों की तस्वीरें कुछ बैनरों से नदारद रहीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह आयोजन महानगरपालिका की सामूहिक पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया था या किसी एक नेता की राजनीतिक छवि को प्रमुखता देने का प्रयास था?
हालांकि, बैनरों पर तस्वीरें नहीं होने के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। संबंधित पदाधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने पर ही स्थिति साफ हो सकेगी।
इस घटनाक्रम को लेकर प्रभाग क्रमांक 23 के राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चाएं होने की बात कही जा रही है। स्थानीय राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या मनपा के भीतर पदाधिकारियों के बीच तालमेल की कमी है या फिर संगठन में अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश चल रही है?
एक ओर महानगरपालिका के कार्यक्रम में सभी पदाधिकारियों को उचित प्रतिनिधित्व दिए जाने की अपेक्षा रहती है, वहीं दूसरी ओर प्रचार सामग्री में तस्वीरों की मौजूदगी और अनुपस्थिति को राजनीतिक महत्व मिलने लगा है। यही वजह है कि ‘यूनिटी मैराथन’ का आयोजन अब खेल और एकता के संदेश के साथ-साथ स्थानीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।
अब पोस्टर वॉर की बारी?
महानगरपालिका की राजनीति में बैनर और पोस्टर केवल प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि कई बार राजनीतिक प्राथमिकताओं और प्रभाव का संकेत भी माने जाते हैं। ऐसे में ‘यूनिटी मैराथन’ के बैनरों से कुछ नेताओं की तस्वीरें गायब होने के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले कार्यक्रमों में किसे कितनी प्रमुखता मिलती है।
क्या यह केवल बैनर तैयार करने में हुई चूक है या मनपा के भीतर वर्चस्व की राजनीति का संकेत? क्या सत्ता पक्ष के नेता और स्थायी समिति अध्यक्ष के बीच मतभेद वास्तव में बढ़ रहे हैं? फिलहाल इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं हैं, लेकिन शहर के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जरूर तेज हैं।
अब देखना यह होगा कि नागपुर महानगरपालिका की राजनीति में यह मामला यहीं थमता है या आने वाले दिनों में पोस्टर वॉर के रूप में नई सियासी तस्वीर सामने आती है।
भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंच सकता है मामला?
मनपा के ‘यूनिटी मैराथन’ के बैनरों को लेकर शुरू हुई चर्चाओं के बीच अब यह भी चर्चा सामने आ रही है कि इस मामले को पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचाया जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि बैनरों पर प्रमुख पदाधिकारियों की तस्वीरें नहीं होने और कार्यक्रम में एक नेता को अधिक प्रमुखता दिए जाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री अथवा नागपुर के वरिष्ठ पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
चर्चा यह भी है कि इस पूरे घटनाक्रम को मनपा के भीतर बढ़ते राजनीतिक वर्चस्व और पदाधिकारियों के बीच समन्वय के मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पत्र लिखने का निर्णय लिया गया है या वास्तव में कोई पत्र तैयार किया जा रहा है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
यदि यह मामला पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचता है, तो मनपा के सत्ता पक्ष के भीतर चल रही खींचतान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो सकती हैं। अब देखना होगा कि यह विवाद बैनरों तक सीमित रहता है या फिर मुख्यमंत्री अथवा वरिष्ठ नेतृत्व के हस्तक्षेप तक पहुंचता है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
रन फॉर यूनिटी में दौड़ेगी जनता, लेकिन मनपा की सत्ता में ‘यूनिटी’ पर सवाल!
एकता का संदेश देने निकली मनपा, लेकिन बैनरों से गायब नेताओं की तस्वीरों ने बढ़ाई सियासी हलचल; सत्ता पक्ष में आपसी मतभेद या वर्चस्व की जंग?
‘रन फॉर यूनिटी’ के जरिए एकता का संदेश देने वाली नागपुर महानगरपालिका में क्या सत्ता पक्ष के भीतर ही एकता की कमी है? मैराथन के बैनरों से प्रमुख पदाधिकारियों की तस्वीरें गायब होने के बाद अब यही सवाल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह उठ रहा है कि जब मंच और बैनरों पर ही एकता नजर नहीं आ रही, तो सत्ता पक्ष के भीतर सब कुछ ठीक कैसे माना जाए?








