– अमरावती में आग से तीन नवजातों की मौत की घटना
नागपुर/अमरावती :- अमरावती के जिला महिला अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में लगी आग ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे में तीन नवजात बच्चों की मौत हो गई। इनमें स्वप्निल बोरगे का नवजात बेटा भी शामिल था, जिसका जन्म महज एक दिन पहले हुआ था। बोरगे ने अभी तक अपने बच्चे का चेहरा भी नहीं देखा था।
अस्पताल के शवागार के बाहर बैठे बोरगे पूरी तरह टूटे हुए थे। उन्होंने कहा, ‘मैंने अभी उसका चेहरा भी नहीं देखा था। अब अपनी पत्नी पूजा को यह बात कैसे बताऊं, यही समझ नहीं आ रहा। उसे पता चलेगा तो वह बहुत दुखी हो जाएगी।‘ यह हादसा सोमवार तड़के करीब 4 बजे जिला महिला अस्पताल की एनआईसीयू में हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, उस समय यूनिट में कुल 39 नवजात भर्ती थे। आग लगने के समय एनआईसीयू में नौ बच्चे थे। इनमें एक बच्चा वेंटिलेटर पर, जबकि आठ बच्चे वार्मर पर थे। हादसे में वेंटिलेटर पर मौजूद बच्चे समेत तीन नवजातों की मौत हो गई। हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन और बचाव दल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 36 नवजातों को सुरक्षित बाहर निकाला। इनमें से 32 बच्चों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है, जबकि चार बच्चों को उनकी माताओं के साथ रखा गया है। अमरावती के जिला शल्यचिकित्सक डॉ. विनोद पवार ने प्रारंभिक जानकारी के आधार पर बताया कि वेंटिलेटर में तकनीकी खराबी के कारण घटना होने की आशंका है। हालांकि, आग के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। इस मामले में पुलिस ने तीन नवजातों की मौत को लेकर आकस्मिक मृत्यु की प्रविष्टियां दर्ज की हैं।

सात दिन में जांच रिपोर्ट
सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर ने अस्पताल पहुंचकर घटना का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य आयुक्त संजय काटकर की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई है। समिति पूरे मामले की जांच कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी।

पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने मृत नवजातों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
हादसे के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, एनआईसीयू में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और उनकी निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अब जांच समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसके लिए कौन-सी लापरवाही जिम्मेदार रही





