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नागपुर में रोज 74 एमएलडी पानी की कटौती

– राज्य सरकार का 10% कटौती का निर्देश, आपात स्थिति के लिए 10% पानी रहेगा रिजर्व

नागपुर :- कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव के कारण राज्य में पानी की उपलब्धता कम होने की आशंका के बीच महाराष्ट्र सरकार ने जल वितरण को लेकर प्राथमिकता आधारित योजना लागू की है। इसके तहत सभी शहरी स्थानीय निकायों को 16 अक्टूबर से न्यूनतम 10% पानी की बचत/कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं। यह व्यवस्था 31 अगस्त 2027 तक लागू रहेगी।

नागपुर में वर्तमान में प्रतिदिन करीब 740 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है। इसमें पेंच जलप्रणाली से 520 एमएलडी और कन्हान जलप्रणाली से 220 एमएलडी पानी मिलता है। 10% कटौती लागू होने पर नागपुर की आपूर्ति में करीब 74 एमएलडी प्रतिदिन की कमी आ सकती है।

पीने के पानी को सर्वोच्च प्राथमिकता

जल संसाधन विभाग के नागपुर मंडल की मुख्य अभियंता सोनाली चोपड़े के अनुसार, जल आवंटन में सबसे पहली प्राथमिकता पीने के पानी को दी जाएगी। नागपुर के लिए 31 अगस्त 2027 तक 259 मिलियन घन मीटर पानी पहले ही आरक्षित किया गया है। इसके बाद वाष्पीकरण और जलाशयों में गाद के कारण घटने वाली वास्तविक क्षमता को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध पानी का आकलन किया जाएगा।

इसके अलावा उपलब्ध पानी का 10% आपातकालीन रिजर्व के रूप में अलग रखा जाएगा। इसका इस्तेमाल केवल आपात स्थिति में पीने के पानी की जरूरत पूरी करने के लिए किया जाएगा।

उद्योगों के बाद खेती के लिए पानी:

पीने के पानी और आपातकालीन रिजर्व के बाद पानी का आवंटन उद्योगों और कृषि के लिए किया जाएगा। उद्योगों को पानी का पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग बढ़ाने तथा कम से कम 30% पुन: उपयोग योग्य पानी को रिसाइकिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

कृषि के लिए भी प्राथमिकता तय की गई है। सबसे पहले बीज उत्पादन, उसके बाद रबी चारा फसल, फिर रबी सिंचाई को पानी दिया जाएगा। इसके बाद मौसमी फसलों और सबसे अंत में बारहमासी फसलों को प्राथमिकता मिलेगी।

बांधवार बनेगी जल उपयोग योजना:

सरकार ने प्रत्येक जलाशय के लिए अलग-अलग जल उपयोग योजना तैयार कर मंजूर कराने के निर्देश दिए हैं। इसमें जलाशय की कुल और उपयोगी क्षमता, वाष्पीकरण, गाद तथा विभिन्न क्षेत्रों के लिए आवश्यक पानी का आकलन किया जाएगा।मनपा समेत स्थानीय निकायों को 10% पानी बचाने, लीकेज रोकने और जल संरक्षण के उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को पूरी क्षमता से संचालित करने को कहा गया है।

जल आवंटन की निगरानी के लिए जिला पालकमंत्री की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। इसमें कलेक्टर, मनपा आयुक्त और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समेत अन्य अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति बांधवार जल उपयोग योजनाओं को मंजूरी देगी। हालांकि, जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पीने के पानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। 10% कटौती का अर्थ पीने के पानी की आपूर्ति में सीधे कटौती करना नहीं है।

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