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हीटवेव व लेट मानसून का डबल असर

– सब्जियां 40% तक महंगी

नागपुर :- इस वर्ष पड़ी भीषण गर्मी और लंबी हीटवेव की अवधि ने आम जनजीवन पर गहरा असर डाला है। तापमान के लगातार 45 डिग्री के आसपास बने रहने और मानसून में देरी का सीधा असर थाली पर नजर आने लगा है। शहर में सब्जियों की कीमतों में 30 से 40 फीसदी तक की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।

बाजारों में आवक कम : सब्जी व्यापारियों के अनुसार, इस बार की अत्यधिक गर्मी ने खेती को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। तेज धूप और लू के कारण खड़ी फसलें झुलस गईं, खासकर फूल वाली सब्जियां जैसे भिंडी, टमाटर और लौकी पर ज्यादा असर पड़ा। कई क्षेत्रों में उत्पादन घटने से बाजार में आवक कम हो गई, जिससे कीमतों में उछाल आया। नागपुर डिवीज़न में 32274.34 हेक्टेयर आर सब्जियों का लागत क्षेत्र हैं, जिसमें 316217.45 मीट्रिक टन प्रोडक्शन होता है।

मानसून में देरी से बिगड़ी सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ा : व्यापारियों और कलमना मंडी के ब्रोकरों का कहना है कि मानसून के देर से आने से स्थिति और खराब हो गई है। नई फसल की आवक समय पर नहीं हो पा रही, जिससे बाजार में आपूर्ति प्रभावित हुई है। मांग और सप्लाई के असंतुलन ने दामों को और ऊपर पहुंचा दिया। डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी ने परिवहन लागत को भी प्रभावित किया है। बाहरी राज्यों से आने वाली सब्जियों पर लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने के कारण थोक बाजार में ही कीमतें बढ़ गईं, जिसका असर सीधे खुदरा बाजार पर पड़ा।

थोक से खुदरा तक बढ़े दाम, उपभोक्ता परेशान : पिछले कुछ हफ्तों में थोक बाजार में शुरू हुई कीमतों की बढ़ोतरी अब खुदरा बाजार तक पहुंच चुकी है। विक्रेताओं का कहना है कि बढ़ी हुई लागत के कारण उनके पास यह बोझ ग्राहकों पर डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इससे आम लोगों, खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद : विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून जल्द सक्रिय होता है और आपूर्ति सामान्य होती है, तो सब्जियों के दाम में कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल, शहरवासी महंगाई और मौसम की दोहरी मार झेल रहे हैं।

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