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‘1500 से 2100 रुपये तक बढ़ेगी मदद’

– फडणवीस का ऐलान; 80 लाख नाम हटने पर विपक्ष का हंगामा

मुंबई :- ‘मुख्यमंत्री मेरी लाड़ली बहन’ योजना से 80 लाख महिलाओं के नाम सूची से हटाए जाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकार का पक्ष रखा। सोमवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें उन्हीं को रोका गया है जो अयोग्य हैं और गैर केवाईसी के हैं। उन्होंने साफ किया कि सरकार फिर से केवाईसी के लिए तैयार है, लेकिन अयोग्य महिला लाभार्थियों को कोई पैसा नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लाड़ली बहन योजना का उद्देश्य महिलाओं को केवल 1500 रुपए देना नहीं है। आज हम महिलाओं को 1500 रुपए दे रहे हैं, भविष्य में इसे 2100 रुपए तक बढ़ाएंगे। लेकिन, सिर्फ पैसे देने से सबकुछ नहीं बदल जाएगा। हमारा लक्ष्य राज्य में ज्यादा से ज्यादा ‘लखपति दीदी’ तैयार करना है। उधर, 80 लाख महिलाओं के नाम सूची से हटाए जाने के मुद्दे को लेकर विपक्ष भी राज्य सरकार पर हमलावर हो गया है। राकांपा (शरद) विधायक रोहित पवार ने कहा कि एक भी महिला लाभार्थी कम हुई तो राज्य भर में आंदोलन किया जाएगा।

फडणवीस ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि हमने किसी को भी निकाला नहीं है। लाभार्थी होने की कई शर्तें थीं। हमने केवाईसी की शुरुआत की, लेकिन जिन्होंने केवाईसी नहीं की तो संदेह हुआ। पता चला कि इनमें 14 हजार पुरुष हैं, 5 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, 10 लाख लोग आयकर भरते हैं और 5 लाख के पास अपने वाहन हैं। जो अयोग्य और गैर केवाईसी के हैं उन्हें रोका है।

80 लाख महिलाओं के नाम कटने पर सियासत गरम

25 लाख महिलाओं की केवाईसी गलत थी, तो हमने उन्हें ठीक करवा दिया। राकांपा (शरद) विधायक रोहित पवार ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि ई-केवाईसी सिर्फ बहाना है, सरकार का असली मकसद चरणबद्ध तरीके से लाभार्थियों की संख्या कम कर योजना को बंद करना है। पवार ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि चुनाव से पहले योजना के तहत 2.47 करोड़ महिलाओं को लाभार्थी बताया गया था, लेकिन अब सरकार लाखों महिलाओं के नाम हटा रही है।

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