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नागपुर में मेडिट्रीना हॉस्पिटल घोटाला: डॉ. पालटेवार दंपति और अन्य पर ₹16.83 करोड़ के वित्तीय गड़बड़ी का मामला

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<p><strong>नागपुर &colon;-<&sol;strong> रामदास पेठ स्थित मेडिट्रीना हॉस्पिटल में भारी वित्तीय गड़बड़ियों के मामले ने सुर्खियां बटोर दी हैं। इस घोटाले में अस्पताल के संस्थापक डॉ&period; समीर पालटेवार और उनकी पत्नी सोनाली पालटेवार समेत कुल 17 लोग और कंपनियां आरोपी हैं। पुलिस ने 17 सितंबर 2025 को भादंसं की धाराओं 409&comma; 406&comma; 420 और 120&lpar;b&rpar; के तहत मुकदमा दर्ज किया। यह मामला डॉ&period; पालटेवार पर दर्ज पाँचवां मामला है।<&sol;p>&NewLine;<p><strong>घोटाले का तरीका<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;<p>पुलिस जांच के अनुसार&comma; 2012 में डॉ&period; पालटेवार&comma; आईटी सलाहकार गणेश चक्करवार और अन्य लोगों ने मिलकर मेडिट्रीना इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस प्रा&period; लि&period; &lpar;पूर्व में VRG हेल्थकेयर प्रा&period; लि&period;&rpar; नामक कंपनी की स्थापना की। इसके बाद डॉ&period; पालटेवार&comma; उनकी पत्नी और पुत्र निनाद ने ऑब्विएट हेल्थ केयर प्रा&period; लि&period; नामक नई कंपनी बनाई और उसका बैंक खाता संख्या 50200029991860 खोला।<&sol;p>&NewLine;<p>2020–21 से 2023–24 के बीच अस्पताल के खाते से इस कंपनी के खाते में ₹11&period;42 करोड़ ट्रांसफर किए गए। इन लेनदेन को &&num;8220&semi;हेल्थ केयर डिजिटल कंसल्टेंसी&comma; मार्केटिंग और विज्ञापन&&num;8221&semi; के फर्जी बिलों के माध्यम से छुपाया गया। इस पूरी योजना में हॉस्पिटल का अकाउंटेंट अर्पण किशोर पांडे और अन्य कर्मचारियों की भी भूमिका सामने आई है।<&sol;p>&NewLine;<p>2024 में वार्षिक लेखा परीक्षा के दौरान यह खुलासा हुआ कि ऑब्विएट हेल्थ केयर प्रा&period; लि&period; और अन्य कंपनियों के नाम पर फर्जी बिल बनाकर कुल ₹16&period;84 करोड़ का घोटाला किया गया।<&sol;p>&NewLine;<p>घोटाले के सामने आने के बाद नागपुर महानगरपालिका ने हॉस्पिटल की IPD पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही अग्निशमन और आपातकालीन सेवा विभाग ने हॉस्पिटल में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण इसे असुरक्षित घोषित किया है।<&sol;p>&NewLine;<p>हॉस्पिटल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगते हैं कि कर्मचारियों और मरीजों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं दी गई। इस घटना ने मेडिकल सेक्टर में वित्तीय पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।<&sol;p>&NewLine;<p>वित्तीय और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ ₹16&period;83 करोड़ के घोटाले तक सीमित नहीं है। हॉस्पिटल जैसी संस्थाओं में ऐसे घोटाले से मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी असर पड़ता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकारी निगरानी और नियमित ऑडिट को और सख्त किया जाना चाहिए।<&sol;p>&NewLine;<p>इस घोटाले के बाद हॉस्पिटल में इलाज करा रहे मरीज और कर्मचारी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हॉस्पिटल में आपातकालीन और अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कमी की जानकारी मिलने के बाद कई मरीजों ने अस्पताल बदलने का निर्णय लिया। वहीं&comma; कर्मचारी भी नौकरी की सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।<&sol;p>&NewLine;<p>पुलिस ने घोटाले की जांच शुरू कर दी है। सभी आरोपी और कंपनियों के दस्तावेजों की जाँच की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामले में फर्जी बिल&comma; निधि हेराफेरी और धोखाधड़ी के सबूत अदालत में प्रस्तुत किए जाएंगे।<&sol;p>&NewLine;<p>साथ ही&comma; यह मामला नागपुर और महाराष्ट्र के मेडिकल सेक्टर में वित्तीय पारदर्शिता के लिए चेतावनी भी है। यदि समय पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई&comma; तो ऐसे घोटाले और बढ़ सकते हैं।<&sol;p>&NewLine;<p>मेडिट्रीना हॉस्पिटल घोटाले ने यह साबित कर दिया है कि हॉस्पिटल जैसी संवेदनशील संस्थाओं में वित्तीय और प्रशासनिक निगरानी कितनी जरूरी है। मरीजों की सुरक्षा&comma; कर्मचारियों के अधिकार और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। डॉ&period; पालटेवार दंपति और अन्य आरोपी अब कानूनी शिकंजे में फंस सकते हैं&comma; और इस मामले की जांच से आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है।<&sol;p>&NewLine;

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