– विवादों से घिरी 131 करोड़ की जलयोजना
– कार्य की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल
गड़चिरोली :- गड़चिरोली शहर की बहुप्रतीक्षित अतिरिक्त जलापूर्ति योजना शुरुआत से ही विवादों में घिर गई है। 131.54 करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी योजना में बिना पूर्व सूचना काम शुरू करने और घटिया सामग्री के उपयोग के आरोप सामने आने से प्रशासन और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। उधर नप प्रशासन को किसी तरह की सूचना नहीं मिलने से इस कार्य पर स्वयं प्रशासन कैसे नियंत्रण रखेगा? ऐसा सवाल भी अब उपस्थित किया जा रहा है।
बता दें कि, राज्य सरकार के नगर विकास विभाग ने अक्टूबर 2024 में नगरोत्थान महाभियान योजना के तहत गड़चिरोली शहर के लिए अतिरिक्त जलापूर्ति योजना को प्रशासकीय मंजूर दी। योजना के तहत गढ़चिरोली शहर में 167 किमी की अतिरिक्त पाइप लाइन बिछाने के लिए 131.54 करोड़ रुपए को मंजूरी प्रदान की गयी। निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद 12 सितंबर 2025 को यह कार्य नागपुर के मे. एनआरईपीसी प्रोजेक्ट लिमिटेड कंपनी को प्रदान किया गया। मात्र कंपनी ने कार्य शुरू करने की पूर्व सूचना नगर परिषद प्रशासन को न देते हुए गुड़ीपाड़वा के पूर्व पर 19 मार्च से यह कार्य शुरू कर दिया। इस कार्य के लिए शहर के विसापुर परिसर में उत्खनन शुरू किया गया। वहीं बोरमाला घाट परिसर में पाइप लाइन पहुंचायी गयी लेकिन यह सामग्री निम्न स्तर की होने के आरोप अब होने लगे हैं। इस संदर्भ में नप के निर्माणकार्य सभापति अनिल कुनघाडकर, जलापूर्ति सभापति लीलाधर भरडकर, जलापूर्ति समिति सदस्य व पार्षद श्रीकांत देशमुख और नप के स्वीकृत सदस्य सागर निंबोरकर ने 25 मार्च को जिलाधिकारी से शिकायत भी की है। उधर सरकारी परिपत्रक में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है कि, मंजूर प्रकल्प की सभी प्रकार की देखभाल और दुरुस्ती के संदर्भ में आवश्यक नियोजन नगर परिषद प्रशासन को करना है। लेकिन इस योजना का कार्य शुरू करने के पूर्व ठेकेदार द्वारा किसी तरह की पूर्व सूचना नहीं दिए जाने से करोड़ों रुपए की यह योजना शुरुआती दौर से ही विवादों में फंसती नजर आ रही है। शहर वासियों को आगामी 30 वर्ष तक नियमति और शुद्ध जलापूर्ति करने के लिए इस योजना का कार्य प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
जांच में पायी गयी थी अनियमितता : बता दें कि, जलापूर्ति योजना में उजागर हुई अनियमितता के बाद 10 मार्च को घटनास्थल की जांच की गयी। जहां पर सामग्री के प्रमाण और प्रत्यक्ष उपलब्ध सामग्री में कमी देखी गयी थी। इस पर नप प्रशासन ने संबंधित ठेकेदार को लिखित रूप में सूचनाएं देकर उचित पाइप का उपयोग करने के निर्देश दिए थे। लेकिन सभी नियमों को ताक पर रखकर निम्न स्तर के पाइप का इस कार्य में उपयोग किए जाने का आरोप नप के सभापतियों व पार्षदों ने लगाया है। गड़चिरोली शहर के लिए 131 करोड रुपए की यह अतिरिक्त जलापूर्ति की येजना महत्वपूर्ण है। आगामी 30 वर्षों तक चलेगी, ऐसी गुणवत्ता वाले पाइप का इस योजना में उपयोग करना आवश्यक है। वहीं योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।








