– हजारों श्रद्धालुओं ने किया भव्य स्वागत, 19 अगस्त को शेगांव पहुंचेगी पालकी
बुलढाणा :- पंढरपुर से शेगांव की ओर लौट रही श्री गजानन महाराज संस्थान, शेगांव की पालकी मंगलवार को विदर्भ में प्रवेश कर गई। 29 जुलाई को पंढरपुर से वापसी यात्रा शुरू करने वाली पालकी का मराठवाड़ा और विदर्भ की सीमा पर स्थित न्हावा गांव में हजारों श्रद्धालुओं ने पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया। पालकी के साथ 700 से अधिक वारकरी शामिल हैं।
‘विठ्ठल नाम’ और संतों के जयघोष के बीच पालकी के न्हावा पहुंचते ही क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बन गया। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के गणमान्य लोगों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पालकी का स्वागत किया। पालकी के आगमन को लेकर न्हावा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पुलिस प्रशासन की ओर से पालकी मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। न्हावा से पालकी जालना और सिंदखेडराजा मार्ग से आगे बढ़ी। बुधवार को पालकी राजमाता जिजाऊ के मायके सिंदखेडराजा में मुक्काम पर पहुंची।
19 अगस्त को शेगांव पहुंचेगी पालकी
पालकी का बुलढाणा जिले में निर्धारित कार्यक्रम इस प्रकार है, 12 अगस्त बिबी, 13 को लोणार, 14 को मेहकर, 15 को जानेफल, 16 को शिर्ला नेमाने, 17 को आवार, 18 को खामगांव में ठहराव होगा। इसके बाद 19 अगस्त को पालकी शेगांव पहुंचेगी। श्री गजानन महाराज की पालकी 21 जून को 700 से अधिक वारकरियों के साथ शेगांव से पंढरपुर के लिए रवाना हुई थी। 23 जुलाई को पालकी पंढरपुर पहुंची। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर 24 से 28 जुलाई तक पालकी का पंढरपुर में मुक्काम रहा। इसके बाद 29 जुलाई को शेगांव के लिए वापसी यात्रा शुरू हुई।
57वें वर्ष की पदयात्रा
श्री गजानन महाराज पालकी समारोह का यह 57वां वर्ष है। संस्थान की ओर से वर्षों से चली आ रही पैदल वारी की परंपरा को इस वर्ष भी कायम रखा गया है। शेगांव से पंढरपुर और वापसी मिलाकर वारकरी करीब 1,300 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर रहे हैं। पंढरपुर से शेगांव की वापसी यात्रा करीब 550 किलोमीटर की है। पालकी के शेगांव पहुंचने के साथ ही इस लंबी धार्मिक पदयात्रा का समापन होगा।





