– रात 10 बजे के बाद शोर पर कोर्ट की नाराज़गी: “क्या पुलिस आयुक्त को सुनाई नहीं देता?”
– डीजे और पटाखों पर हाई कोर्ट की फटकार : बुजुर्गों की खामोशी को सहमति न समझें
नागपुर :- बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने शहर की सड़कों और रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रहे ढाबे, रेस्टोरेंट्स और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कारण नागरिकों को होने वाली भारी परेशानी पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने एक जनहित याचिका में राज्य के गृह विभाग के प्रधान सचिव, पुलिस प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब केवल एफआईआर दर्ज करने जैसी कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर ठोस समाधान चाहिए। यह जनहित याचिका डॉ. ललित हरोदे और अन्य द्वारा दायर की गई है। मामले पर न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील वरिष्ठ विधिज्ञ अक्षय नाईक ने कोर्ट को बताया कि हालांकि याचिका में शंकर नगर की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है, लेकिन यह समस्या पूरे नागपुर शहर की है। शहर के विभिन्न हिस्सों में चल रहे अवैध ढाबे और रेस्टॉरेंट्स के कारण नागरिकों को भारी असुविधा और यातायात की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन इसे केवल कानूनी लड़ई न समझे, बल्कि इसे व्यवस्था सुधारने और अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों पर लगाम कसने के एक अवसर के रूप में ले। अदालत ने अब इस मामले में 14 जनवरी को सुनवाई रखी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ विधिज्ञ अक्षय नाईक, एड. पार्थ मालवीय और राज्य सरकार की ओर से मुख्य सरकारी वकील देवेंद्र चौहान ने पैरवी की।
सुनवाई के दौरान जब शहर में रात 10 बजे के बाद होने वाले शोर-शराबे का मुद्दा उठा, तो अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पूरे शहर की बात तो छोड़िए, खुद सिविल लाइन्स इलाके की स्थिति देखिए। यहां न्यायमूर्तियों और प्रशासनिक अधिकारियों के निवास हैं। यहां तक कि खुद पुलिस आयुक्त का बंगला भी यहीं है। इसके बावजूद देर रात तक तेज आवाज में पटाखे फोड़े जाते हैं। क्या पुलिस आयुक्त को इस बारे में कोई अहसास नहीं होता ?
अगली सुनवाई 14 जनवरी को
अदालत ने इस बात पर मौखिक तौर पर गहरी चिंता जताई कि शहर के रेस्टोरेंट्स, मैरिज हॉल और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में रात 10 बजे के बाद भी जोर-जोर से डीजे बजाए जाते हैं और तेज आवाज वाले पटाखे फोड़े जाते हैं। कोर्ट ने कहा कि नियमों का ऐसा खुला उल्लंघन आम नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों और बीमारों के लिए भारी परेशानी का कारण बन रहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बुजुर्गों द्वारा शिकायत दर्ज न करने का मतलब यह कदापि नहीं है कि उन्हें इससे कोई तकलीफ नहीं होती। इसके अलावा, अदालत ने डीजे के अत्यधिक शोर के कारण नासिक में एक 14 वर्षीय बच्चे की मौत होने का उदाहरण देते हुए चिंता जताया.








