– मानव-हाथी संघर्ष रोकने की तैयारी, पेंच टाइगर रिजर्व में दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग
नागपुर :- विदर्भ में जंगली हाथियों के बढ़ते आवागमन और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत पेंच टाइगर रिजर्व में रखे गए दो एशियाई नर हाथियों ‘भीमा’ और ‘सुब्रमण्यम’ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद इन हाथियों की मदद से गोंदिया, गड़चिरोली, चंद्रपुर सहित विदर्भ के अन्य प्रभावित जिलों में जंगली हाथियों को नियंत्रित करने और मानव बस्तियों में उनके प्रवेश को रोकने के प्रयास किए जाएंगे।
पेंच टाइगर रिजर्व के चोरबाहुली क्षेत्र में स्थापित एलिफेंट कैंप में 55 वर्षीय भीमा और 27 वर्षीय सुब्रमण्यम को रखा गया है। वन विभाग का उद्देश्य इन हाथियों को इस तरह प्रशिक्षित करना है कि वे जंगली हाथियों से जुड़े रेस्क्यू अभियानों और मानव-हाथी संघर्ष को नियंत्रित करने में प्रभावी भूमिका निभा सकें। सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक से विशेषज्ञों की एक टीम पेंच पहुंचकर दोनों हाथियों को आवश्यक प्रशिक्षण देगी। हालांकि, प्रशिक्षण पूरा होने और उनकी क्षमता का आकलन होने के बाद ही प्रभावित क्षेत्रों में उनके उपयोग को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
भीमा और सुब्रमण्यम को वर्ष 2023 में कर्नाटक से पेंच टाइगर रिजर्व लाया गया था। जानकारी के अनुसार, दोनों हाथियों को महाराष्ट्र में ही पकड़ा गया था, लेकिन उस समय उपयुक्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें कर्नाटक भेजना पड़ा था। अब पेंच में उनकी मदद से वन विभाग मानव-हाथी संघर्ष की चुनौती से निपटने की दिशा में प्रयास कर रहा है।
रेस्क्यू अभियानों में निभा रहे अहम भूमिका
पिछले कुछ वर्षों से विदर्भ के विभिन्न इलाकों में जंगली हाथियों के झुंड की आवाजाही बढ़ी है। हाथियों के कारण खेतों में खड़ी फसलों और रिहायशी क्षेत्रों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आती रही हैं। लगभग तीन वर्ष पहले छत्तीसगढ़ की ओर से विदर्भ में दाखिल हुआ हाथियों का एक झुंड पहले गोंदिया जिले में पहुंचा। इसके बाद यह झुंड गड़चिरोली होते हुए तेलंगाना की ओर बढ़ा। हाथियों की आवाजाही महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच भी जारी रही है।
इस स्थिति को देखते हुए वन विभाग हाथियों की निगरानी, उनके आवागमन के प्रबंधन और प्रभावित क्षेत्रों में संभावित नुकसान को कम करने के लिए योजनाएं तैयार कर रहा है। अब तक भीमा और सुब्रमण्यम का उपयोग पेंच तथा आसपास के बाघ अभयारण्यों में बाघों के रेस्क्यू अभियानों के लिए किया जाता रहा है। विशेष प्रशिक्षण मिलने के बाद वन विभाग को मानव-हाथी संघर्ष से निपटने के लिए भी उनकी मदद मिलने की उम्मीद है।
महावत की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण
जंगली हाथियों के साथ अभियान चलाना जोखिम भरा होता है। वन अधिकारियों के अनुसार, भीमा और सुब्रमण्यम को प्रशिक्षित करने के दौरान उनके महावत की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है। जंगली हाथी खतरा महसूस होने पर आक्रामक हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें शांत करने या नियंत्रित करने के प्रयास के दौरान महावत की जान को खतरा हो सकता है।
इसी वजह से दोनों हाथियों को विशेष परिस्थितियों में काम करने, निर्देशों का पालन करने और तनावपूर्ण हालात में नियंत्रित व्यवहार बनाए रखने का प्रशिक्षण देना जरूरी है।
ट्रैंक्विलाइजेशन में सहायता:
घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में, जहां वाहनों का पहुंचना मुश्किल होता है, वहां प्रशिक्षित हाथियों की मदद से वनकर्मी संबंधित क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की देखरेख में जंगली हाथी को बेहोश करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
विशेष प्रशिक्षण:
कुमकी हाथियों को इस तरह प्रशिक्षित किया जाता है कि वे कठिन परिस्थितियों में महावत के निर्देशों का पालन कर सकें। ऐसे अभियानों में हाथियों, महावतों और वनकर्मियों की सुरक्षा सर्वोपरि रहती है।
भीमा और सुब्रमण्यम को मिलने वाला प्रशिक्षण विदर्भ में मानव-हाथी संघर्ष को नियंत्रित करने के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ प्रशिक्षण पूरा होने, अभियान की परिस्थितियों और वन विभाग की रणनीति पर निर्भर करेगा।








