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स्वच्छ भारत अभियान के शौचालय निर्माण कागजों में पूरे, ज़मीन पर अधूरे  

गोंदिया /गोरेगांव :- गोरेगांव तहसील में स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत बनाए जा रहे शौचालय भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ते नजर आ रहे हैं। अनेक गांवों में शौचालय निर्माण कार्य वर्षों से अधूरे पड़े हैं, जबकि कई स्थानों पर समय से पहले ही शौचालय जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि कई निर्माण कार्यों के बिल तो पास कर दिए गए, लेकिन धरातल पर काम अब भी अधूरा है। इस गंभीर मामले की जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोरेगांव तहसील के ग्राम सोनी स्थित नोनीटोला आंगनवाड़ी केंद्र में पिछले दो वर्षों से शौचालय निर्माण कार्य कछुआ चाल से चल रहा है। अधूरे निर्माण के कारण बच्चों को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यही स्थिति मोहगांव शाला में भी देखने को मिल रही है। इसके अलावा कुछ ग्राम पदाधिकारियों द्वारा अपने निजी ठिकानों पर शौचालय निर्माण कराने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं, जिससे संबंधित विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रशासन द्वारा प्रत्येक शौचालय निर्माण पर लगभग 3 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इसमें स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत जिला परिषद से 2 लाख 10 हजार रुपये तथा 15वें वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायत द्वारा 90 हजार रुपये की निधि प्रदान की जाती है। वर्ष 2024-25 में तहसील क्षेत्र में शालाओं, आंगनवाड़ी केंद्रों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में कुल 82 शौचालयों के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। स्वच्छ भारत अभियान के अनुसार इनमें से 60 शौचालय पूर्ण बताए गए हैं, किंतु जमीनी हकीकत इससे अलग है। अधिकांश शौचालयों के बिल तो निकाल लिए गए हैं, लेकिन कार्य आज भी अधूरे हैं।

वहीं वर्ष 2026-27 में स्वीकृत 25 नए शौचालयों के निर्माण कार्य अब तक प्रारंभ नहीं हो सके हैं।

इस संबंध में SBM अभियंता राहुल भांडारकर ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है। नोनीटोला व मोहगांव में चल रहे शौचालय निर्माण कार्य को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश संबंधित ठेकेदार को दिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि तहसील क्षेत्र में कई निर्माण कार्य नीति के अभाव के कारण रुके हुए हैं।

 स्वच्छता योजना पर सवाल, सख्त कार्रवाई की मांग

शौचालय निर्माण में सामने आई अनियमितताओं को लेकर क्षेत्र की जनता में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छ भारत अभियान जैसी महत्वपूर्ण योजना में लापरवाही और भ्रष्टाचार बर्दाश्त योग्य नहीं है। अधूरे शौचालयों के कारण बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनता ने मांग की है कि जिन निर्माण कार्यों के बिल निकाल लिए गए हैं लेकिन काम अधूरा है, उनकी तत्काल जांच कर दोषी ठेकेदारों एवं संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी अधूरे शौचालयों को समय-सीमा में पूर्ण कराने की भी पुरजोर मांग उठाई जा रही है।

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