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विश्व को आज सॉल्युशन चाहिए, संघ और ब्रह्माकुमारीज़ का उद्देश्य एक ही है, बस रास्ता अलग-अलग है“ डॉ.भागवत

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<div dir&equals;"auto"><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><strong>राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ&period; मोहन भागवत ने लिया मुख्य अतिथि के रूप में भाग<&sol;strong><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><strong>संपूर्ण दुनिया को सुख-शांतियुक्त सुंदर बनाने वाला काम कर रही है ब्रह्माकुमारीज़<&sol;strong><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><strong>ब्रह्माकुमारीज़ नागपुर के विश्व शांति सरोवर का सातवां वर्धापन दिवस मनाया<&sol;strong><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><strong>मुख्यालय आबूरोड से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने लिया भाग<&sol;strong><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><strong>नागपुर १३ &colon;<&sol;strong> नागपुर ब्रह्माकुमारीज़ नागपुर के विश्व शांति सरोवर का सातवां वर्धापन दिवस मनाया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ&period; मोहन भागवत ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ मनुष्य के कल्याण का काम कर रही है। अपने पूरे राष्ट्र के हित का काम कर रही है और यह संपूर्ण दुनिया को सुख-शांतियुक्त सुंदर बनाने वाला काम है। ब्रह्माकुमारीज़ शील और चरित्र जगाते हैं और चरित्र जगाने का आधार है &&num;8211&semi; शरीर-मन-बुद्धि के परे जाकर अपने अंतर की यात्रा करना। संघ भी कहता है कि बनना है तो अंदर से बनो। चरित्र के अंदर शील होता है। बाहर का बोलना&comma; चलना&comma; फिरना ठीक करना है तो अंदर की प्रवृत्ति ठीक होना चाहिए। उसके लिए गहराई में अंदर उतरकर वहां से हम सब ठीक करते हैं। सबका तरीका अपना-अपना है लेकिन मूल में एक ही है &&num;8211&semi; अंदर को जगाओ। एक ही उद्देश्य को लेकर परस्पर कार्य करने वालों को परस्पर पूरक होना आवश्यक है। हम आपस में परस्पर सहयोगी होकर चलें&comma; परस्पर बाधक न बनें। आज दुनिया की आवश्यकता है कि भारतवासी फिर से भरपूर होकर दुनिया को सिखाएं। उन्होंने कहा कि मैं बहुत जल्द माउंट आबू आऊंगा। मैं ज्ञान देने के लिए नहीं सीखने के भाव से माउंट आबू आऊंगा।<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">दुनिया में सारा झगड़ा स्व का है<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">डॉ&period; भागवत ने कहा कि दुनिया में सारा झगड़ा स्व का है। जब यह भावना हो जाती है कि मुझे चाहिए तो हम दूसरे के हित के बारे में नहीं सोचते हैं। दुनिया में यह डर रहता है कि यह बड़ा होगा तो हमारा क्या होगा। भारत बड़ा होगा तो हमारा स्थान कहां होगा। इसलिए ट्रैरिफ लागू करो। जिसने किया था उसको थोड़ा पुचकार रहे कि भारत साथ रहेगा तो थोड़ा दबाव बना रहेगा। यह बातें मैं और मेरा के चक्कर में की जा रही हैं। जब हमें यह समझ में आता है कि मैं और मेरा मतलब हम और हमारा है तो सारी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। विश्व को आज सॉल्युशन चाहिए। उन्होंने अपनी अधूरी दृष्टि से हल निकालने का प्रयास किया लेकिन नहीं मिला&comma; क्योंकि मिलना संभव नहीं है। पैसा तो मुर्गी भी नहीं खाती है&comma; यह सिर्फ भारत में सुनाई देता है&comma; भारत के बाहर सुनाई नहीं देता है।<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">डॉ&period; भागवत जी बोले-&ast; राष्ट्र के नाते भारत अपने आप को जानता है<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">डॉ&period; भागवत ने कहा कि शरीर से परे जो अमर सत्व है वह सत्य है। हमारे पूर्वजों ने हमें यह अक्षर ज्ञान दिया है। उसे हम थोड़ा भूल गए हैं लेकिन आज भी बीजरूप में वह हमारे अंदर है। राष्ट्र के नाते भी भारत अपनेआप को जानता है। भारत कहता है कि हम एक बडा देश हैं और हमें बड़ा बनना है&comma; भरपूर बनना है। वह कहता है कि हमको इसलिए बनाया गया है कि समय-समय पर मनुष्य के विचारों में जो जोड़ने वाले तत्व और आत्मा को पहचानने की कमी होती है उसे पूरा करने के लिए हमें एक देश के नाते जीना है&comma; बड़ा बनना है&comma; भरपूर बनना है। जैसे एक साधारण इंसान की बात को कोई तवज्जो नहीं देता है&comma; वैसे ही दुनिया भी जो बड़ा है उसकी बात को मानती है&comma; इसलिए हमें भरपूर बनना है। दुनिया में जो भरपूर हैं वह अपनी शक्ति के बल पर दूसरों को दबाते हैं&comma; आक्रमण करते हैं। भारत ने अपने आप को पहचाना है&comma; भारत कहता है कि हम इसके लिए नहीं हैं।<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">सभी एक परमात्मा की संतान हैं-<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">डॉ&period; भागवत जी ने कहा कि असली सत्य है कि मैं क्या हूं। जब तक आदमी यह नहीं जानता है तब तक उसकी समस्याएं हल नहीं होती हैं। सभी एक परमात्मा की संतान हैं। सारी सृष्टि उसकी बनाई है। हम लोग भी अंदर के इस अपनेपन को जगाने का ही काम कर रहे हैं। रास्ता थोड़ा अलग है&comma; कार्यक्रम अलग हैं&comma; लेकिन उद्देश्य एक ही है। दोनों का कार्य बहुत ज्यादा मिलता है। जैसे ब्रह्माकुमारीज़ सेवाओं के विस्तार के लिए किसी से कोई खर्चा नहीं मांगते हैं&comma; वैसे ही संघ भी कार्य करता है। संघ को सभी मिलकर चलाते हैं।<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">सरसंघचालक डॉ&period; भागवत जी ने कहा कि &ast;अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम&ast; क्योंकि हमें यह कनेक्शन पता है। यह भाव हमारे अंदर है लेकिन हमारी कृति से भी दिखना चाहिए। भारत पहले से भरपूर है&comma; जरूरत है तो भारतवासियों को भरपूर होने की। इसलिए भारतवासियों को इस तरह का ज्ञान देने वाले समय-समय पर आते हैं। जैसे गीता के भगवान आए&comma; जैसे शिव बाबा आए। प्रकृति विविध है&comma; रुचि विविध है। किसी को कोई गाना पसंद आता है&comma; किसी को कोई गाना पसंद आता है। सभी लोगों को सही रास्ते पर लाने के लिए&comma; वहां तक जाने के सभी के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन एक ही तत्व खेल कर रहा है। कई तरह की कार्यपद्धति को लेकर काम करने वाले प्रवाह आज भारत में विद्यमान हैं। उसमें एक बहुत बड़ा विराट प्रयास ब्रह्माकुमारीज़ का है। ब्रह्माकुमारीज़ में भैया-बहनों का रिश्ता है तो सारी समस्याएं यहीं खत्म हो जाती हैं।<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">भारत को पूरे विश्व को नई राह दिखानी है-<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">भागवत ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से लेकर आज तक सभी महापुरुषों ने यही बात की है कि भारत को बड़ा और भरपूर बनना है&comma; क्योंकि भारत को पूरे विश्व को नई राह दिखानी है। इसलिए भारत में आज भी अभाव में लोग सुखी रहते हैं। हमारे यहां लोगों को दुख&comma; दर्द&comma; असुविधा के बीच भी संतोष है। भारत में हाथठेला चलाने वाला भी पेड़ की छांव में आराम से सोता है और अन्य देशों में करोड़ों कमाने वाले भी नींद की गोलियां लेकर भी नहीं सो पाते हैं। हमारे पास अपनापन है&comma; इसलिए हमारे पास संतोषधन है।<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">आबूरोड से प्रति निधिमंडल ने लिया भाग-<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">कार्यक्रम में शांतिवन मुख्यालय से पहुंचे अतिरिक्त महासचिव डॉ&period; बीके मृत्युंजय भाई ने कहा कि आज पूरे विश्व को शांति&comma; प्रेम&comma; सद्भावना&comma; एकता की आवश्यकता है। ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय द्वारा भारत सहित पूरे विश्व को आध्यात्मिक ज्ञान दिया जा रहा है। भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए 50 हजार से अधिक ब्रह्माकुमारी बहनें पूरे समर्पण भाव से सेवा में जुटी हैं। महाराष्ट्र वह महान भूमि है जहां देशभर में सबसे अधिक ब्रह्माकुमारी बहनें बनीं हैं। संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी संतोष दीदी ने कहा कि भारत वह महान भूमि है जिसने दुनिया को जो विचार दिया है वह कोई और नहीं दे सकता है। भारत में ही रामराज्य था और फिर से रामराज्य बनेगा। वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके ऊषा दीदी ने कहा कि आज ब्रह्माकुमारीज़ से विश्वभर में दस लाख से अधिक ऐसे भाई-बहनें जुड़े हैं जो घर-गृहस्थ में रहते हुए ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कर रहे हैं। एक लाख से अधिक कुमार घर में रहते&comma; जिम्मेदारियों का पालन करते हुए पवित्रता के व्रत को धारण किया है। वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके शारदा दीदी ने सभी को राजयोग मेडिटेशन से गहन शांति की अनुभूति कराई।<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">शॉल पहनाकर और स्मृति चिंहृ देकर किया सम्मान-<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto">आरएसएस प्रमुख भागवत का अतिरिक्त महासचिव डॉ&period; बीके मृत्युंजय भाई&comma; वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका राजयोगिनी ऊषा दीदी और शांतिवन आवास-निवास के प्रभारी बीके देव भाई ने भी स्वागत किया। नागपुर की संचालिका बीके रजनी दीदी ने संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी संतोष दीदी का शॉल पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान पीआरओ बीके कोमल ने संस्थान की सेवाओं की वार्षिक सेवा रिपोर्ट सेवांजली भेंट करते हुए सामाजिक सेवाओं के बारे में बताया। कार्यक्रम विशेष रुप से दक्षिण नागपुर से आमदार भ्राता श्री मोहन मते जी&comma; पुर्व सांसद भ्राता कृपाल तुमाने जी&comma; सेन्ट्रल मेम्बर आफ खादी अन्ड विलेज इन्डस्ट्रीज् कमिशन के भ्राता जयप्रकाश जी गुप्ता&comma; काॅन्फीडन्स ग्रुप के चेअरमॅन भ्राता नितीन जी खारा&comma; हल्दीराम के शिवकिशन अग्रवाल जी&comma; VNIT नागपुर के चेअरमॅन भ्राता मदाभुशी मदन गोपाल जी&comma; VNIT नागपुर के डायरेक्टर भ्राता प्रेमलाल पटेल जी तथा संघ के भ्राता राजेश लोया जी&comma; भ्राता रविंद्र बोखारे जी आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सहसंचालिका बीके मनिषा दीदी ने किया।<&sol;div>&NewLine;<div dir&equals;"auto"><&sol;div>&NewLine;

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