आधुनिक युग में मानव निर्मित संसाधन बैलगाड़ियों, बलिराज के स्तंभों और मजदूरों के लिए कठिनाई का कारण बन गए हैं। मनुष्य ने इन संसाधनों का निर्माण अपनी सुविधा और समय बचाने के लिए किया है। हालांकि, इन संसाधनों से जितना लाभ हुआ है, उतना ही नुकसान भी हुआ है। बैलगाड़ियों और मजदूरों को मजदूरी से वंचित करने वाले संसाधनों के उपयोग को कम से कम किया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार द्वारा अनिवार्य प्रतिबंध लगाने की तत्काल आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की कमी है। काम केवल फसल के मौसम में ही उपलब्ध होता है। अब, ट्रैक्टर, जेसीबी, क्रेन आदि जैसे संसाधनों ने मजदूरों का शारीरिक श्रम छीन लिया है। एक मशीन सौ लोगों का काम करती है और वह भी बहुत कम समय में। ‘मजदूर उपलब्ध नहीं हैं’ कहकर फतवे जारी किए जा रहे हैं। मशीनों का व्यापक रूप से उपयोग हो रहा है। मशीनों ने मजदूरों को भुखमरी की स्थिति में ला दिया है। हालांकि कई सरकारी कार्यों में मजदूरों को काम मिलने के प्रावधान हैं, ठेकेदार मशीनों से काम करवा रहे हैं। मशीनों के बिना, मजदूरों को दुगुनी दैनिक मजदूरी मिलती। परिवार में सुख होता। मशीनों ने बैलगाड़ी में जुते बैलों की गर्जना को खामोश कर दिया। बलिराज के बैलगाड़ी से खेतों में जाने का समय और छोटे बच्चों के स्कूल जाने का समय एक ही होता था। आधुनिक संसाधनों के कारण, बैलों की मधुर गर्जना धीरे-धीरे लुप्त हो गई है। सरकार ने वन्य जीवों के अस्तित्व को बचाने के लिए कड़े नियम बनाए हैं। साथ ही, बैलों के अस्तित्व को बचाने के लिए, सरकार को विभिन्न संसाधनों के अत्यधिक उपयोग पर कड़े नियम बनाने चाहिए और बैलों को संरक्षण प्रदान करना चाहिए। अन्यथा, यह कहना गलत नहीं होगा कि अगली पीढ़ी किसानों के देवता, ‘बैल’ को केवल किताबों में ही देखेगी। इसलिए सरकार को बैलों और मजदूरों के प्रति सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। बैलों के अस्तित्व को बचाने के लिए तत्काल उपाय लागू करने की आवश्यकता है।








